तीन दिन तेंदुए के बीच – रोमांचक सत्य घटनांए – 1
Real Thrilling Incidents – Three Days Between Leopards Written By : Utpal Mehta (ઉત્પલ મહેતા) 6th May, 2026 रोमांच, बारिश और मौत से सामना प्रकृति, भय, रोमांच और जीवन के सबसे अविस्मरणीय अनुभवों की दास्तान भुमिका … नमस्कार मित्रों, मैं मूलतः गुजराती भाषी हूँ। हिंदी बोलने का अवसर जीवन में थोडा-बहुत मिला, क्योंकि मेरा अधिकांश समय मुंबई में बीता और हिंदी फ़िल्मों, टीवी धारावाहिकों तथा हिंदीभाषी मित्रों के बीच रहना हुआ। परंतु किसी भाषा को बोलना और उसी भाषा में प्रभावशाली लेखन करना — दोनों अलग बातें हैं। हिंदी लेखन में मेरी सीमाएँ हैं, किंतु प्रकृति, जंगल और रोमांच के प्रति जो लगाव है, वह बिल्कुल अलग बात है, कह शकते है की यह मेरा एक पेशन है। सो यह अनुभव, में प्रमाणिकता के साथ यहां प्रस्तुत करने कोशिश रहा हूँ। जब मैंने डिजिटल मैगज़ीन शुरू कीया, तब भाषा को लेकर कोई निश्चित योजना नहीं थी। लेकिन धीरे-धीरे महसूस हुआ कि ओर विषयों के साथ यदि प्रकृति और वन्यजीवन के ऐसे अनुभव केवल क्षेत्रीय भाषा तक रहे तो वह सीमित रह जाएँगे। भले ही मेरी हिंदी साहित्यिक न हो, पर यदि मेरी बात देश-विदेश के प्रकृति-प्रेमियों तक पहुँच शके, नई पीढ़ी को जंगल और प्रकृति के प्रति आकर्षित कर शके, तो यही, इस प्रयास की सबसे बड़ी सफलता होगी। यह वह समय है की जब मनुष्य को फिर से प्रकृति की ओर लौटने की आवश्यकता है। जंगल, प्रकृति केवल रोमांच नहीं देते, वे भीतर की थकान को धोते हैं, मन को शांत करते हैं और जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। यह अनुभव सिध्ध स्टेट्मेंट है, जीस की चर्चा फीर कभी। वन्यजीवन, एडवेंचर टूर और विशेष रूपसे गर्मीओं में हिमालय यात्राएँ — यह मेरा सबसे बड़ा शौक रहा है। हर यात्रा के बाद मैं स्वयं को भीतर से बदला हुआ महसूस करता हूँ। मेरे और मेरे जैसे ही लाइक माइन्डेड दोस्तों के कुछ रोमांचक – थ्रिलिंग अनुभव रहें है, मानता हुं पाठकों को यह जरूर पसंद आएगा, इन्हीं अनुभवों को अलग-अलग अध्यायों में आपके सामने रखने का यह प्रयास है। यह केवल यात्रा-वृत्तांत नहीं, बल्कि प्रकृति के बीच जीए गए वास्तविक क्षणों का दस्तावेज़ है। हर यात्रा के बाद ऐसा लगता है मानो भीतर कोई नई शक्ति जन्म ले चुकी हो। जहां ह्म कुदरत के ज्यादा करीब पहुंचा हुआ महेसुस कर पाए. इस श्रृंखला में वर्णित घटनाएँ पूर्णतः सत्य हैं। इनमें रोमांच अवश्य है, परंतु कहीं भी कल्पना का सहारा लेकर नाटकीय तत्व जोड़ने का प्रयास नहीं किया गया है। जो जैसा घटित हुआ, उसे उसी रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। सामान्यत: प्रवास वर्णन आम विषय की अपेक्षा, विस्त्रुत होता है, वही उसकी मजा है। यह कहानी नहीं है। यह एक ऐसा अनुभव है, जहां खतरा, रोमांच, जंगल जिवनकी अनुभुति और भय एक ही रास्ते पर साथ-साथ चलते रहे है। मेरे वे मित्र, जिनकी वजह से यह यात्रा संभव हुई ;- मेरे कुछ आत्मिय मित्र वर्षों से इको-टूरिज़्म और वाइल्डलाइफ़ एडवेंचर से जुड़े हुए हैं। उनमें से एक हैं कर्णावती (अहमदाबाद) निवासी श्री मनिष वैद्य, और दूसरे हैं धरमपुर, वलसाड निवासी श्री परेश रावल, ग्रुप में जिन्हें सभी “पार्थ” नामसे ज्यादा जानते हैं। मनीषभाई एज्युकेशन से वकील हैं, पर्यावरण विशेषग्य हैं, और देश की कई एडवाइजरी कमिटियों, रिज़र्व फ़ॉरेस्ट, सेंचुरी और नेशनल पार्क्स से जुड़े रहे हैं। प्रकृति के प्रति उनके गहरे प्रेम ने उन्हें पर्यटन को केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य बना ने प्रेरित किया। उनकी संस्था “लोरिस एसोसिएट्स” इको-टूरिज़्म क्षेत्र में विशेष कार्य करती है। इसी प्रकार, वलसाड, धरमपुर स्थित मित्र पार्थ ने “नेचर डिस्कवरी” नाम से संस्था बनाई है, जिसके अंतर्गत अनेक प्रकृति एवं जंगल यात्राओं का आयोजन किया जाता है। शुरुआत — यह घटना वर्ष 2018 के मानसून की है। मनीषभाई दक्षिण गुजरात में एक नए इको-टूरिज़्म स्पॉट की तलाश में थे। इसी सिलसिले में हमारे मित्र श्री योगेशभाइपाटील और राकेशभाइ पाटील ने हमें सोनगढ़ फ़ोर्ट आने आमंत्रित किया। उनका “कैल्स” नामक होटल महाराष्ट्र बॉर्डर के नजदीक, एक शांत और घने जंगल से घिरे क्षेत्रके नजदिक में स्थित है। जिवनमें एक बार अवश्य मुलाकात करने योग्य स्थल है, मोनसुनमें “कैल्स” होटेल के सौंदर्य को शब्दो में वर्णीत कर पाना मुश्किल है . यह इलाका साधारण जंगल नहीं है। हम इस सर्च के अंतर्गत, दक्षिण गुजरात के सोनगढ फोर्ट के पास में स्थित, घने जंगल की ट्रीप पर निकले, जंगल का, बारिश के दौरान का माहोल मुश्किल ओर जोखिम भरा होता है । मनीषभाई अहमदाबाद से आ रहे थे। किसी कारणवश उन्हें देरी हो गई, इसलिए वडोदरा से निकलने में भी हमें दो-तीन घंटे देर हो गई। हम शाम लगभग पाँच बजे मेरी मारुति कार से निकले। गुजरात के हाईवे, यदि सावधानी से ड्राइव किया जाए, तो किसी “लॉन्ग ड्राइव एक्सपीरियंस” से कम नहीं लगते। हम दक्षिण गुजरात के घने जंगलों की ओर निकल पड़े। कहो, जंगल हमें बुला रहा था… हम बड़ौदा से शाम करीब पांच बजे निकले। गुजरात के लंबे हाईवे पर धीमी बारिश के बीच सफर किसी फिल्मी दृश्य जैसा लग रहा था। कहीं चाय, कहीं कॉफी, कहीं सड़क किनारे नाश्ता… बिना जल्दबाजी के सफर आगे बढ़ रहा था। बरसात की मौसम में जंगल का वातावरण अत्यंत सुंदर होने के साथ-साथ खतरनाक भी होता है। कीचड़, फिसलन, अंधेरा, जंगली जानवर और अनिश्चित रास्ते — हर क्षण जोखिम से भरे होते हैं। में इस संदर्भ मे थोडा मूडी हुं, कहीं बार ऐसा हुआ है की सफर के दौरान अगर रास्ता जंगल से गुजरता हो तो में कार साइड मे खडी कर के कुछ देर वहीं बीता ने कोशिश करता हुं। कभी डर भी लगता है, उसे भगाने भी कोशिश करता हुं. मगर मुजे वह थ्रीलींग लगता है. जो लोग केवल सुरक्षित और आरामदायक पर्यटन पसंद करते हैं, वे जंगल प्रवास से दूर रहे। सीर्फ होटेल “कैल्स” अनुभव भी काफी है. उसके आसपास का सौंदर्य भी आपको अदभुत कुदरती अनुभव महेसुस कराएगा. मित्र योगेशभाई पाटील और उनके छोटे भाई राकेश पाटील “कैल्स” को एक सुंदर होटल के रुप में सम्हाल रहे है। इतना दूरस्थ इलाका होने के बावजूद वहाँ रहने और भोजन की उत्तम व्यवस्था है। आसपास तेंदुओं का दिखाई देना वहाँ आम बात मानी जाती है। यही क्षेत्र के बिलकुल नजदिक से महाराष्ट्र सीमा की शुरुआत भी

